राष्ट्र रक्षक फाउंडेशन

भूभाग नहीं, शत–शत मानव के हृदय जीतने का निश्चय।
हिन्दू तन–मन, हिन्दू जीवन, रग–रग हिन्दू मेरा परिचय!

स्वर्गीय अटल जी द्वारा रचित ये पंक्तियाँ ही राष्ट्र रक्षक फाउंडेशन का प्रथम एवं अंतिम परिचय है। ये संगठन वीर शिवाजी, महाराणा प्रताप, गुरु तेगबहादुर, पृथ्वीराज चौहान, महारानी पद्मावती जैसे उन शूरवीरों और वीरांगनाओं को समर्पित है जिन्होंने स्वयं को एवं अपने परिवार को धर्म रक्षार्थ न्योछावर कर दिया परन्तु क्रूर मुगलों की आधीनता स्वीकार नहीं की। आज हमारे ही समाज का एक बड़ा वर्ग तुच्छ राजनीती के वशीभूत होकर भले ही क्षद्म धर्मनिरपेक्षता का ढोंग कर रहा है लेकिन कटु सत्य यह है कि सम्पूर्ण सनातन धर्म संकट में है। यदि समय रहते सनातन धर्म की रक्षा के लिए हम हिन्दुओं ने उचित प्रयास नहीं किये तो वो दिन दूर नहीं जब हमारा अस्तित्व पूरी तरह से खत्म हो जायेगा। इसलिए हे हिन्दू योद्धाओं, राष्ट्र रक्षक फाउंडेशन आपसे करबद्ध प्रार्थना करता है कि अपने दैनिक क्रिया कलापों को करते हुए धर्म रक्षा के लिए भी समय दान, श्रमदान करें और जाति बंधन से मुक्त होकर हिन्दू समाज को सुदृढ़ बनायें।

जय श्रीराम

यदि आप अपने धर्म की रक्षा नहीं करेंगे तो धर्म भी आपकी रक्षा नहीं करेगा, इसलिए निर्भय होकर धर्म रक्षार्थ तत्पर रहिये, धर्म स्वयं आपकी रक्षा करेगा।