दूध देने वाली गाय को लात नहीं मारी जाती मोदी जी, दुलार किया जाता है, लिहाजा आप भी दुलारिए।

भारतीय जनता पार्टी को अपने उन्हीं मुद्दों पर कायम रहना होगा जिसके दम पर वो 2014 का चुनाव जीते थे

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राजा मांडा के नक़्शे कदम पर चल रहे हैं हमारे मोदी जी

आजकल देश की राजनीति में एक भूचाल सा आया हुआ है। राजनीति के अंगद माने जाने वाले नरेंद्र दामोदार दास मोदी के पैर भी हिलते नजर आ रहे हैं। हालांकि अभी इस अंगद के पैर पूरी तरह से उखड़े नहीं हैं लेकिन हालात सुधरे नही ंतो वो दिन दूर नहीं जब ना तो पैर रहेगा और ना पैर के नीचे की जमीन। मैं ऐसा क्यों कह रहा हूं इसके पीछे कुछ ठोस कारण हैं। वो कारण समझाने के लिए आपको थोड़ा फ्लैश बैक में ले चलता हूं। तो जरा गौर से पढ़िए और समझिए:

भारतीय राजनीति में कुछ सालों पहले एक महानुभाव ने कदम रखा। नाम था विश्वनाथ प्रताप सिंह, कुछ लोग उन्हें राजा मांडा भी कहते थे। सवर्ण समाज से आते थे लिहाजा सवर्ण समाज ने उन्हें सिर माथे पर बिठाया और राजा साहब ने सवर्ण समाज के माथे पर पैर रख कर सीधे देश के प्रधानमंत्री की कुर्सी तक का रास्ता तय कर लिया। बस फिर क्या था, एक तो बाबू साहब उपर से राजा साहब, यानि कि एक तो करेला उपर से नीम चढ़ा। राजा साहब अपनी औकात ही भूल गए और सीधी लात मारी उस गाय को जिसका दूध पीकर वो बड़े हुए थे। यानि कि जिस सवर्ण समाज के पीठ को पायदान बना कर सियासत की सीढ़ियां चढ़े थे उसी पीठ में खंजर घोंप दिया। मंडल आरक्षण कानून को केंद्र में लागू करके अपने ही सवर्ण समाज पर कहर ढा दिया। हालांकि जिसे खुश करने के लिए राजा साहब ने ये किया उन्होंने ने भी राजा साहब को कबूल नहीं किया क्योंकि राजा साहब उनकी बिरादरी से नहीं थे। बस फिर क्या था, सवर्ण समाज ने राजा साहब को ऐसी लात मारी कि राजा साहब राजनीतिक पटल से ही गायब हो गए और इसका खामियाजा बड़े पैमाने पर कांग्रेस को भी भुगतना पड़ा।

तत्कालीन प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह, जिन्होंने मंडल कमीशन लागू करके सवर्ण समाज के साथ विश्वासघात किया था

खैर ये तो राजा साहब थे, लेकिन हमारा हिंदू समाज और उसमें भी खासकर सवर्ण समाज तो इस कदर दरियादिल है कि एक चाय बेचने वाले को भी देश का सर्वेसर्वा चुन लिया। 2014 में हिंदुओं ने खास कर सवर्ण समाज ने नरेंद्र दामोदर दास मोदी को पूर्ण बहुमत से देश का मुखिया चुना। मगर सिर्फ मोदी को ही क्यों ? क्योंकि सत्ता में आने से पहले मोदी साहब ने राम मंदिर, गौवध कानून, काॅमन सिविल कोड, धारा 370 जैसे तमाम मुद्दों पर हिंदुओं को हसीन सपने दिखाए थे। लेकिन ये क्या सत्ता में आने के बाद सबकुछ उल्टा हो गया। राम मंदिर तो बना नहीं लेकिन पैगबंर के लिए प्यार उमड़ पड़ा। गौवध कानून तो बना नहीं लेकिन गौरक्षक गुंडे हो गए। काॅमन सिविल कोड तो बना नहीं लेकिन विशेष रूप से मुस्लिम लड़कियों को 50 हजार का शगुन पैकेट मिलने लगा। चलिए हम ये सब भी बर्दाश्त कर लेते लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई। जो सवर्ण समाज बीजेपी का सबसे बड़ा वोट बैंक है, मोदी जी ने उसी पर तलवार चला दी, जानलेवा एससी/एसटी एक्ट कानून पास करके।

केंद्र सरकार द्वारा लागू किये गए नए एससी/एसटी एक्ट ने सवर्ण समाज को झकझोर कर रख दिया

फिर क्या होना था, एक बार फिर से दुधारू गाय ने लात मार दी और मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ के साथ ही राजस्थान से हाथ धोना पड़ा। मोदी जी मैं हिंदुओं को बांटने की बात नहीं कर रहा लेकिन एक बात स्पष्ट है कि दलित समाज मायावती को छोड़ कर आपको कभी वोट नहीं करेगा, यादव समाज समाजवादी पार्टी को नहीं छोड़ सकता। बस एक सवर्ण समाज है जो आपकी राजनीतिक बैसाखी है, इसलिए सवर्ण समाज को घर की मुर्गी समझ कर अपनी इस बैसाखी को मत तोड़िए नही ंतो आप बेसहारा हो जाएंगे और हम हिंदू ये कतई नहीं चाहते। इसलिए दूध देने वाली गाय को लात मत मारिए, इसका दूध पीजिए और सियासी अखाड़े में अंगद की तरह मजबूती से पैर जमाए रहिए।

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