काश! हिन्द का हर मुसलमान हनीफ जैसा हो जाए, एक सच्चे हिंदुस्तानी मुसलमान की अनछुई कहानी, पढ़ियेगा जरूर

हिंद का हर वो मुसलमान जो डाॅ कलाम, अब्दुल हमीद और कैप्टन हनीफ के नक्शेकदम पर चलेगा वो गले लगेगा और जो कसाब, अफजल और बुरहान बनने की कोशिश करेगा वो गोली खाएगा।

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श्रीमती हेमा अजीज (अमर शहीद कैप्टन हनीफ उद्दीन की माँ )

जय हिंद साथियों

                 सोशल मीडिया पर अक्सर आपने देखा होगा कि हिंदू मुसलमान आपस में लड़ते रहते हैं। मैं स्वयं एक हिंदूवादी संगठन का अध्यक्ष हूं लिहाजा कई बार मुझे भी इस्लातिक आतंकवाद के खिलाफ मुखर होना पड़ता है। इस्लामिक आतंकवाद शब्द का प्रयोग इसलिए कर रहा हूं क्योंकि विश्व के 98 प्रतिशत आतंकी संगठन इस्लामिक ही हैं और उन्हें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन करने वाला देश पाकिस्तान भी पूरी तरह से एक इस्लामिक देश है। लेकिन ऐसा नहीं है कि हम हिंदूवादी लोग मुसलमानों से नफरत करते हैं। हमें नफरत है तो इस्लामिक कट्टरता से, उनकी हिंसात्मक प्रवृत्ति से, वर्ना हम हिंदू ही हैं जो अशफाक उल्ला खां को अपने दिल में बसा कर रखते हैं, वीर अब्दुल हमीद को आज भी नमन करते हैं, अपने बच्चों को डाॅ कलाम जैसा बनाने का सपना देखते हैं। खैर ऐसे बहुत से हिंदुस्तानी मुसलमान हैं जो हमें हमारे हिंदुओं से ज्यादा प्रिय हैं लेकिन आज मैं जिस हिंदुस्तानी मुसलमान का परिचय आपसे कराने जा रहा हूं उसकी कहानी सुन कर आप भी पूरी श्रद्धा से अपना सिर झुका लेंगे।

अमर शहीद कैप्टन हनीफ उद्दीन (मरणोपरांत वीर चक्र)

ये सच्ची कहानी है कारगिल शहीद कैप्टन हनीफ उद्दीन की। 25 साल की उम्र में जब दिल्ली के युवा अपनी प्रेमिका की बाहों में बाहें डाले हसीन ख्वाब देखा करते हैं, उसी उम्र में कैप्टन हनीफ ने अपनी मां के ख्वाबों को तोड़ कर मां भारती की गोद में अपना सबकुछ न्योछावर कर दिया। कारगिल की जंग में कैप्टन हनीफ के शहीद होने के बाद 40 दिनों तक सेना को उनका पार्थिव शरीर नहीं मिला। उस समय तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल वीपी मलिक ने जब कैप्टन हनीफ की मां श्रीमति हेमा अजीज से कहा कि, दुश्मन की तरफ से लगातार फायरिंग हो रही है, ऐसे में हनीफ की बाडी खोजने में दिक्कत हो रही है। तब हनीफ की मां श्रीमति हेमा अजीज ने कहा था कि सेना के हर जवान की जान की कीमती है लिहाजा मेरे बेटे की डेडबाडी खोजने के लिए किसी भी जवान की जान जोखिम में ना डाली जाए।

तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल वेद प्रकाश मलिक

तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व अटल जी द्वारा ऑपरेशन विजय की घोषणा के बाद शहीद कैप्टन हनीफ को मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया। जब केंद्र सरकार द्वारा श्रीमति हेमा अजीज को पेट्रोल पंप देने की पेशकश की गई तो उन्होंने ये कह कर ठुकरा दिया कि मेरा बेटा कोई नौकरी नहीं कर रहा था, वो तो देश के प्रति अपना फर्ज निभा रहा था और जब वो जंग पर गया था तब मुझे उसके वापस आने की कोई उम्मीद भी नहीं थी लिहाजा मुझे ये पेट्रोल पंप नहीं चाहिए। आज भले ही कैप्टन हनीफ हमारे बीच नहीं हैं लेकिन जब भी उनका जिक्र आएगा, हमारा सिर श्रद्धा से झुक जाएगा। अंतिम में बस एक ही बात कहना चाहूंगा हिंद के मुसलमानों से कि पाकिस्तानपरस्ती, जेहाद, गजवा-ए-हिंद के नापाक मंसूबे छोड़ कर मां भारती के सच्चे सपूत बनो ना कि बुरहान वानी और अफजल बनो।

भारत माता की जय

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